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Kasak Teri Yaadon Ki
Kasak Teri Yaadon Ki

    Paperback : 120 INR

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ISBN : 978-93-86352-63-7

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परिस्थिति जन्य विषमताओं के कारण मेरा व्यक्तित्व विद्रोह, उग्रता, और कुंठाओं से ग्रसित होता चला गया। लगभग बारह वर्ष की आयु तक आते-आते मेरा आक्रोश अपनी चरम सीमा पर पहुँच चुका था। मेरे हृदय में जो ‘धधक’थी वह मेरी प्रत्येक रचना की प्रणेता हैं। मैंने अपनी पीड़ा, उपेक्षा, तिरस्कार की कभी अवहेलना नहीं की। इसको सम्मानपूर्वक स्वीकार करते हुए अपने व्यक्तित्व का व्यापक अंश बना लिया। जैसे पारखी लोग कोयले की खानों से हीरा ढूँढ लेते हैं, उसी प्रकार मैं दुःख रूपी कोयले से सुख रूपी ‘‘कसक” ढूँढ लेती हूँ और तब मुझे अपार तृप्ति और आत्म तुष्टि प्राप्त होती है।

Publisher : Onlinegatha

Edition : 1

ISBN : 978-93-86352-63-7

Number of Pages : 100

Weight : 110 gm

Binding Type : Paperback

Paper Type : Cream Paper(70 GSM)

Language : Hindi

Category : Poetry

Uploaded On : May 13,2017

मिथिलेश शर्मा
जन्म तिथि : 10/06/1942
जन्म स्थान : बरेली
शिक्षा : एम०ए० समाजशास्त्र, साहित्यरत्न
व्यवसाय : अध्यापन
अभिरूचि : काव्य लेखन, कहानी लेखन, विद्यालय की वार्षिक पत्रिका में सम्पादन कार्य किया, दैनिक समाचार पत्र एवं पत्रिकाओं में सन् 1960 से लेख छपते रहे हैं।
प्रभाव : महादेवी वर्मा, सुमित्रानन्दन पन्त आदि छायावादी कवियों की रचनाओं से विशेष रूप से प्रभावित। उदाहरण- ‘‘वेदने बस तुम बनी चिरसंगिनी।” ‘‘इतना ताप है अन्तर्मन में जिसकी कोई थाह नहीं है।” ‘‘निस्तब्ध निशा” कविता में नितान्त छायावाद की झलक है।
उर्दू भाषा से भी विशेष लगाव है, ये भाषा विशेष रूप से बहुत मार्मिक है, अपनी टीस, दुःख, पीड़ा को व्यक्त करने में उर्दू भाषा अत्यधिक समर्थ है। रचनाकार इस भाषा के प्रख्यात शायर डॉ० बशीर बद्र, साहिर लुधियानवी, दुष्यन्त कुमार की रचनाओं से प्रभावित हैं।
सेवानिवृत्ति से पूर्व तथा बाद में भी लिखती रही हैं, केवल स्वान्ताय-सुखाय नहीं बल्कि रचनाकार समाज को अपने लेखों व कविताओं के माध्यम से जागृत करने मात्र का उद्देश्य रखती हैं।
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Paperback : 120 INR

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