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Srajan Samagra
Srajan Samagra

Ebook : 100 INR     Paperback : 400 INR

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ISBN : 978-93-86352-45-3

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Publisher : Onlinegatha

Edition : 1

ISBN : 978-93-86352-45-3

Number of Pages : 455

Weight : 220 gm

Binding Type : Ebook , Paperback

Paper Type : Cream Paper(58 GSM)

Language : Hindi

Category : Poetry

Uploaded On : March 10,2017

Partners : Markmybook , google play , Kraftly , Payhip , Amazon , Smashwords , Flipkart , pustakmandi.com

दो शब्द
अभिलेखीय साक्ष्यों के अनुसार 05 मार्च 1954 में जन्में श्री ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव की प्रारम्भिक रचनाएँ ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव ‘‘ज्ञानेश‘‘ नाम से प्रकाशित हुई। बाद में उन्होंने ज्ञानेश श्रीवास्तव नाम से लिखा और छापे। अपनी रचनात्मकता के जरिये पहचान पाने के लिए कृत संकव्य डॉ० ज्ञानेश श्रीवास्तव का प्रारम्भिक बचपन उत्तर प्रदेश के सर्वाधिक पिछड़े जनपद बाँदा में केन नदी के सुरम्य तट पर प्राकृतिक टीले में स्थित दुरेंडी ग्राम में व्यतीत हुआ। प्रारम्भिक शिक्षा के लिए दुरेंडी बाँदा के मध्य लगभग पाँच-छः किलोमीटर की उल्लासपूर्ण यात्रा में सम्पन्न करते हुए, बरसात में अनेक बार डोंगी (छोटी नाव) खेकर केन नदी की विशाल जलराशि पार करते-करते ज्ञानेश के बालमन में प्राकृतिक सरोकरों से रचा-बसा एक सर्वथा निस्पृह कवि कब जन्म ले बैठा, यह स्वयं ज्ञानेश को भी पता नहीं है। छठवीं कक्षा के छात्र जीवन की अल्पवय में ही ज्ञानेश ने कविताएँ लिखनी प्रारम्भ कर दी थीं। उस समय रचित ‘प्रभात‘ नामक कविता की दो पंक्तियाँ आज भी ज्ञानेश की स्मृति में सुरक्षित हैं-
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