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कंकाल
कंकाल

    Paperback : 100 INR

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प्रतिष्ठान के खँडहर में और गंगा-तट की सिकता-भूमि में अनेक शिविर और फूस के झोंपड़े खड़े हैं। माघ की अमावस्या की गोधूली में प्रयाग में बाँध पर प्रभात का-सा जनरव और कोलाहल तथा धर्म लूटने की धूम कम हो गयी है; परन्तु बहुत-से घायल और कुचले हुए अर्धमृतकों की आर्तध्वनि उस पावन प्रदेश को आशीर्वाद दे रही है। स्वयं-सेवक उन्हें सहायता पहुँचाने में व्यस्त हैं। यों तो प्रतिवर्ष यहाँ पर जन-समूह एकत्र होता है, पर अब की बार कुछ विशेष पर्व की घोषणा की गयी थी, इसलिए भीड़ अधिकता से हुई।

Publisher : Onlinegatha

Edition : 1

Binding Type : Paperback

Paper Type : white

Language : Hindi

Category : Fiction

Uploaded On : May 8,2014

PremChand is the author of this book.
Customer Reviews
  • sumit

    Please provide a proper navigation link so that we an easily readout the poems... :)

Paperback : 100 INR

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