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Anant Sanhita
Anant Sanhita

Ebook : 40 INR     Paperback : 150 INR

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ISBN : 978-93-86352-20-0

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सर्वज्ञात तथ्य है तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी यह सिद्ध होता है कि सूर्य के परिक्रमण के दौरान अंतरिक्ष का प्रत्येक पिण्ड, दूसरे पिण्ड को एक निश्चित बल से आकर्षित कर रहा है और इन बलों के सामन्यस्य के परिणामस्वरूप ग्रह-उपग्रह अपनी धुरी पर अनन्त काल से परिक्रमण कर रहे हैं। ग्रहों के द्वि-प्रकार भ्रमण के अन्तर्गत मानव जीवन में भी उथल-पुथल बनी रहती है ओर इसी क्रम में मानव जीवन-चक्र अर्थात जन्म कुण्डली में कुछ योगांे का निर्माण भी होता है।
सभी मनुष्यों में कोतुहल वश यह जिज्ञासा होती है कि, कुण्डली में किन ग्रहोें से कौन-कौन से योग निर्मित हो रहे हंै, ये योग शुभ हंै या अशुभ...............।
उक्त स्थिति में ज्योतिष संबधी, विशेषतया योग-फल संबंधी पुस्तकों के स्वाध्याय की उपयोगिता सिद्ध होती है। इसलिए योग फल ज्ञान प्राप्ति के लिय निर्मित यह पुस्तक सुयोग्यतम सिद्ध हो, ऐसी आशा की जाती है।

Publisher : Onlinegatha

Edition : 1

ISBN : 978-93-86352-20-0

Number of Pages : 106

Weight : 145 gm

Binding Type : Ebook , Paperback

Paper Type : Cream Paper(58 GSM)

Language : Hindi

Category : RELIGION AND SPIRITUALITY

Uploaded On : February 4,2017

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