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Falak
Falak

Ebook : 50 INR     Paperback : 180 INR

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ISBN : 978-93-86352-17-0

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‘‘फलक पर लिखी कहानियों में सामाजिक विषमता से लेकर जीन्स खरीदने में होने वाली किसी लड़के की परेशानी तक है। इस समूह में दक्षिण अफ्रीका में बसे लोग भी शामिल हैं तोऑस्ट्रेलिया से भी सदस्य हैं। हिन्दी लेखकों को अब छपने के लिए किसी आलोचक की स्वीकृति की जरूरत नहीं है।‘‘

Publisher : Onlinegatha

Edition : 1

ISBN : 978-93-86352-17-0

Number of Pages : 162

Weight : 170 gm

Binding Type : Ebook , Paperback

Paper Type : Cream Paper(58 GSM)

Language : Hindi

Category : Fiction

Uploaded On : January 16,2017

Partners : Kraftly , pustakmandi.com , Payhip , google play , Amazon , Flipkart , Snapdeal , Smashwords , Dailyhunt , Markmybook , Purchasekaro.com

‘‘लघुकथा नई विधा नहीं है, पर फेसबुक ने इस विधा को काफी आजादी दी है। अखबारों में छपने वाली लघुकथा और फेसबुक की वॉल पर लिखी लघुकथा में बुनियादी अंतर इन कहानियों के ट्रीटमेंट का है। हमारे आस पास बिखरे लमहों को नन्हीं कहानियों में बुनकर हमारी क्रिएटिव भूख को चारा देने की इस आजादी का सबसे बड़ा श्रेय सोशल मीडिया की असीम संभावना को जाता है। इस ग्रुप को देख कर पहली बार लगा कि अब लिखने और पढ़े जाने के लिए किताब छापने का इंतजार नहीं करना होगा. आज फलक हजारों सदस्य हैं, जो कहानियां लिखते हैं, पढ़ते हैं और उन पर प्रतिक्रियाएं देते हैं. यहां जीवन के सभी क्षेत्रों के लोग हैं, पत्रकार हैं, स्टूडेंट्स हैं, गृहणियां हैं, सेवानिवृत सैनिक हैं ग्रामीण हैं, एनआरआई हैं. ‘‘ द क्विंट
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  • रौशन जसवाल विक्षिप्‍त

    सर डाक खर्च से समस्‍या आ रही है पहले 75 रूपये दिखाए और बाद में 295 जोड़ कर दिखाए मजबूरन मुझे अमेजोन से आर्डर करना पड़ा इसे ठीक करें

Ebook : 50 INR

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