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AamraPali
AamraPali

    Paperback : 150 INR

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ISBN : 81-88062-99-5

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आम्रपाली (महाकाव्य) -एक असहाय दलित महिला द्वारा अपनी सामाजिक राजनीतिक दुर्गति के लिए उत्तरदायी अभिशाप को ही अपना हथियार बना, अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति, जिजीविषा एवं सन्तुलित व्यवहार से विवशताओं का सिर कुचलते हुए राजसत्ताओं तक का मान-मद चूर कर समाज में स्थापित होने से लेकर महाश्रमण गौतक बुद्ध से दीक्षा प्राप्त कर बौद्ध-धर्म की प्रथम भिक्षुणी बनने का गौरव प्राप्त करने की देवी आम्रपाली की संघर्षपूर्ण जीवन- यात्रा का कथोपकथन शैली में लिखा गया अप्रतिम महाकाव्य है। महाकाव्य का प्रारम्भ बौद्ध धर्म के दस महान उपदेशों की गौतम बुद्ध द्वारा की गयी व्याख्या से और अन्त
बृद्धम् शरणम् गच्छामि,
धम्मम् शरणम् गच्छामि
संधम् शरणम् गच्छामि,
के महाघोष से होता है।

Publisher : Onlinegatha

Edition : 1

ISBN : 81-88062-99-5

Number of Pages : 112

Weight : 300 gm

Binding Type : Paperback

Paper Type : Cream Paper(58 GSM)

Language : Hindi

Category : Poetry

Uploaded On : November 19,2016

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डाॅ. चन्द्रिका प्रसाद दीक्षित ‘ललित के अनुसार ‘कुल्हाड़ी कथ्य और शिल्प की पहाड़ी यात्रा के बीच कवि ज्ञानेश श्रीवास्तव का श्रमजीवी चिन्तन वैज्ञानिक यथार्थ की भाँति अर्थसिद्धि देगा। डाॅ. उदयवीर शर्मा ज्ञानेश को ‘लकीर का फकीर न मानकर मनमस्ती और हस्ती का कवि मानते हैं। श्री रमेश कुमार मिश्र ‘सिद्धेश को ‘ज्ञानेश की कविताएँ केंचुल से निकली नागिन सी ताज़ी-टटकी और आकर्षक लगती हैं। ख्याति प्राप्त वयोवृद्ध कवि बाबू केदानाथ अग्रवाल ज्ञानेश की ‘कविताओं में अकेले डूबकर थाह पाने में अपने को असमर्थ पाते हैं। डाॅ. हरिमोहन को ‘ज्ञानेश की कविताएँ छद्म-प्रगतिवाद से अलग ईमानदार प्रगतिशील स्वर लिये हुए पाठक को रचनात्मक युद्ध के लिए तैयार करने की कोशिश में संलग्न दिखाई पड़ती हैं। जबकि डाॅ. मथुरेश नन्दन कुलश्रेष्ठ को ज्ञानेश की ‘काव्य पंक्तियाँ जीवन की सहज एवं अपरिहार्य गति को प्रस्तुत करते हुए जीवन के प्रति आस्था व्यक्त करती लगती हैं। उन्होंने ज्ञानेश की कविताओं को वैयक्तिकता की परिधि की परिधि तोड़कर सार्वजनिक अनुभूति का रूप ग्रहण करते हुए देखा है। डाॅ. अजय तिवारी के अनुसार ‘ज्ञानेश की काव्य भाषा शीतल, सौरभी और अपरूप चितवन के ज़रिये काफ़ी रोमानी मनःस्थिति में चली जाती है। स्वर्गीय कैलाश कल्पित के अनुसार ‘ज्ञानेश अपनी कविताओं में शब्दों के आडम्बर नहीं लादते। वह सहज-सरल शब्दों में धीरे से एक अनुभूति व्यक्त कर देते हैं।
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