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Aadmi-Bhavishya-Hai
Aadmi-Bhavishya-Hai

Ebook : 35 INR     Paperback : 125 INR

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ISBN : 81-88062-98-7

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आदमी भविष्य है (काव्य संकलन) - वर्ष 2003 में प्रकाशित इस संकलन में हिन्दी साहित्य में प्रगतिवादी विचारधारा की प्रख्यात कवित्रयी के मूर्धन्य कवि बाबू केदारनाथ अग्रवाल तथा सुविख्यात समालोचक डाW0 कमला प्रसाद द्वारा चयनित 97 कविताएँ संकलित है। बाबू केदारनाथ अग्रवाल द्वारा अपनी विशिष्ट शैली में लिख गया कविताओं से सम्बन्धित विस्तृत परिचयात्मक आलेख के साथ संकलन के मुख्यपृष्ठ के लिए डाW0 जगदीश गुप्ता द्वारा किया गया चित्रांकन संकलन के महत्व को रेखांकित करने के लिए यशेष्ट है।

Publisher : Onlinegatha

Edition : 1

ISBN : 81-88062-98-7

Number of Pages : 96

Weight : 300 gm

Binding Type : Ebook , Paperback

Paper Type : Cream Paper(58 GSM)

Language : Hindi

Category : Poetry

Uploaded On : November 19,2016

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डाॅ. चन्द्रिका प्रसाद दीक्षित ‘ललित के अनुसार ‘कुल्हाड़ी कथ्य और शिल्प की पहाड़ी यात्रा के बीच कवि ज्ञानेश श्रीवास्तव का श्रमजीवी चिन्तन वैज्ञानिक यथार्थ की भाँति अर्थसिद्धि देगा। डाॅ. उदयवीर शर्मा ज्ञानेश को ‘लकीर का फकीर न मानकर मनमस्ती और हस्ती का कवि मानते हैं। श्री रमेश कुमार मिश्र ‘सिद्धेश को ‘ज्ञानेश की कविताएँ केंचुल से निकली नागिन सी ताज़ी-टटकी और आकर्षक लगती हैं। ख्याति प्राप्त वयोवृद्ध कवि बाबू केदानाथ अग्रवाल ज्ञानेश की ‘कविताओं में अकेले डूबकर थाह पाने में अपने को असमर्थ पाते हैं। डाॅ. हरिमोहन को ‘ज्ञानेश की कविताएँ छद्म-प्रगतिवाद से अलग ईमानदार प्रगतिशील स्वर लिये हुए पाठक को रचनात्मक युद्ध के लिए तैयार करने की कोशिश में संलग्न दिखाई पड़ती हैं। जबकि डाॅ. मथुरेश नन्दन कुलश्रेष्ठ को ज्ञानेश की ‘काव्य पंक्तियाँ जीवन की सहज एवं अपरिहार्य गति को प्रस्तुत करते हुए जीवन के प्रति आस्था व्यक्त करती लगती हैं। उन्होंने ज्ञानेश की कविताओं को वैयक्तिकता की परिधि की परिधि तोड़कर सार्वजनिक अनुभूति का रूप ग्रहण करते हुए देखा है। डाॅ. अजय तिवारी के अनुसार ‘ज्ञानेश की काव्य भाषा शीतल, सौरभी और अपरूप चितवन के ज़रिये काफ़ी रोमानी मनःस्थिति में चली जाती है। स्वर्गीय कैलाश कल्पित के अनुसार ‘ज्ञानेश अपनी कविताओं में शब्दों के आडम्बर नहीं लादते। वह सहज-सरल शब्दों में धीरे से एक अनुभूति व्यक्त कर देते हैं।
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