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ISBN : 978-93-85818-82-0

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लेखक के पहले ही व्यंग्य संग्रह ‘खुदा झूठ न लिखवाये’ को बेस्ट सेलर बना कर पाठक अपने को पहले ही लुटवा चुका है! अब इनके हौसले बुलंद हैं. इनकी ताज़ी डकैती ‘सभी विकल्प खुले हैं’ जैसे व्यंग्य संग्रह के रूप में आपके सामने हैं . इन्होने ‘खूब कही’, ‘हँसते हुए रोना’ जैसी संयुक्त डकैतियां भी डाली हैं . इनके प्रमुख अड्डे हिन्दुस्तान ,अमरउजाला,आई नेक्स्ट,नव भारत टाइम्स,जन सन्देश टाइम्स, हरिभूमि,जनवाणी,प्रभात खबर ,डेली न्यूज़ , कादम्बिनी, व्यंग्य यात्रा , अट्टहास, गवर्नेंसनाउ आदि रहे हैं!

Publisher : Onlinegatha

Edition : 1

ISBN : 978-93-85818-82-0

Number of Pages : 110

Weight : 106 gm

Binding Type : Paperback

Paper Type : Cream Paper(58 GSM)

Language : Hindi

Category : Nonfiction

Uploaded On : September 1,2016

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अलंकार रस्तोगी देश के एक ऐसे कुख्यात व्यंग्यकार है जिनका आतंक लगभग हर पत्र- पत्रिकाओं में छाया रहता है . लखनऊ के अग्रसेन इंटर कॉलेज में अंग्रेजी के लेक्चरर होने के बावजूद इन्होने अपनी टांग हिंदी व्यंग्य में भी डंके की चोट पर अड़ा रखी है. इनके पहले ही व्यंग्य संग्रह ‘खुदा झूठ न लिखवाये’ को बेस्ट सेलर बना कर पाठक अपने को पहले ही लुटवा चुका है. अब इनके हौसले बुलंद हैं. इनकी ताज़ी डकैती ‘सभी विकल्प खुले हैं’ जैसे व्यंग्य संग्रह के रूप में आपके सामने हैं . इन्होने ‘खूब कही’, ‘हँसते हुए रोना’ जैसी संयुक्त डकैतियां भी डाली हैं . इनके प्रमुख अड्डे हिन्दुस्तान ,अमरउजाला,आई नेक्स्ट,नव भारत टाइम्स,जन सन्देश टाइम्स, हरिभूमि,जनवाणी,प्रभात खबर ,डेली न्यूज़ , कादम्बिनी, व्यंग्य यात्रा , अट्टहास, गवर्नेंसनाउ आदि रहे हैं . अब तक इन अड्डों से यह लगभग सात सौ सफल व्यंग्य डकैतियां डाल चुके हैं . जिस मे यह लाखों की दुवायें और करोड़ों का आशीर्वाद लूट चुके है .मज़े की बात तो यह है कि इनपर इनाम रखने के बजाये इनके व्यंग्य आतंक के कारण यह उल्टे उ.प्र. भाषासंस्थान ,सृजन,नव सृजन,अ.भा.अगीत परिषद से सम्मान झटक चुके हैं .देश की विभिन व्यंग्य गोष्ठियों पर इनकी खूंखार निगाहें गड़ी रहती हैं. मौका मिलते ही वहां चौका मारना इनका शगल बन चुका है.इनकी व्यंग्य मुनादियां आकाशवाणी से भी होती रहती हैं .इनकीखुराफातों का हिसाब- किताब यहाँ से भी पाया जा सकता है .
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