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Mere Alfaaz.....
Mere Alfaaz.....

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ISBN : 978-93-86163-17-2

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फोजी लिखता है अपनी पत्नी को शहादत पाने से
पहले जब पता होता है उसको उसकी शहादत तय है।
मुजरिम हूँ मैं तेरा,
जो तेरा साथ ना निभा सका...
कर के तुझसे विवाह,
वो कसमे ना मै निभा सका...
फर्ज से हूँ मैं मजबूर,
जो आखिरी लम्हो मे हूँ तुझसे दूर......
दुआ करना खुदा से,
जब मौत आए तो कम ना हो मेरे चेहरे का नूर...
जब आऊ मै शहादत के बाद,
तो तुम रोना नही...
रख लेना मेरी यादों को संभाल
तुम उनको खोना नही...
अंतिम पैगाम मेरे माँ-बाबा को भी देना.....
इस जन्म मे बना हूँ फौजी,
धरती माँ की शान है फर्ज...
अगले जन्म फिर से बन बेटा उनका,
चुका दूँगा उनका भी हर एक कर्ज...
साथ छोड़ चला मै उनका,
बुढापे का सहारा ना बन पाया...

Publisher : Onlinegatha

Edition : 1

ISBN : 978-93-86163-17-2

Number of Pages : 32

Binding Type : Ebook

Paper Type : Cream Paper(58 GSM)

Language : Hindi

Category : Poetry

Uploaded On : June 30,2016

Partners : Payhip , Smashwords , Kobo , ezebee.com , scribd

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