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Dasha Aur Disha
Dasha Aur Disha

Ebook : 49 INR     Paperback : 150 INR

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9 Reviews

ISBN : 978-93-85818-63-9

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इस पुस्तक “दशा और दिशा” की ज्यादातर रचनाएँ आस - पास के माहौल से ही प्रेरित हैं I कुछ रचनाएं तो केवल भावनाओं की अभिव्य़क्ति हैं और कुछ हिंदी विषयक रचनाएं विचार परक हैं I कहीं - कहीं समस्याओं का चित्रण है, किंतु साथ ही साथ यथा संभव समाधान भी सुझाए गए हैं I कुछ विचार मंथन योग्य रचनाएं है, तो कुछ समाज पर व्यंग हैं I बदलते समाज पर भी प्रतिक्रियाएं हैं, कुछ छोटे व्यंग लघु कथा का रूप लेती नजर आती हैं I “आ अब लौट चलें”, संयुक्त परिवार की तरफ लौटने का एक निमंत्रण है I

Publisher : Onlinegatha

Edition : 1

ISBN : 978-93-85818-63-9

Number of Pages : 142

Weight : 127 gm

Binding Type : Ebook , Paperback

Paper Type : Cream Paper(58 GSM)

Language : Hindi

Category : Fiction

Uploaded On : April 12,2016

Partners : Smashwords , Payhip , Kobo , Ebay , Amazon , Flipkart , shopclues , ezebee.com , Paytm , Rockstand.in , scribd

पूरा नाम माड़भूषि रंगराज अयंगर. प्रचलित नाम एम आर अयंगर जन्म - 13.10.1955 ( 13.10.2015 को उम्र 60 वर्ष) पिता का नाम - स्व. माड़भूषि वेंकट रंगास्वामी अयंगर. माता का नाम – स्व. माड़भूषि ( किलाम्बि) लक्ष्मी (तायारु) वर्तमान पता – प्लॉट नंबार 23 बी, मकान नंबर 1-20-381, रोड नंबर 18, वेंकटसाई नगर, वेस्ट वेंकटापुरम, किरण फंक्शन हॉल के सामने पोस्ट त्रिमलघेरी, सिकंदराबाद 500015 तोलंगाना.
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Customer Reviews
  • VIRENDERA KUMAR

    Beautiful

  • Neeta dhiran

    Andhaviswas aur aastik aur nastik ke bare me ekdum sahi. Man ko bahut jhacha. Mujhe lagta hai aapki ye book sabhi ko padani hi chahiye. Aapka bahut bahut dhanyavad aur pranam

  • Neeta dhiran

    Bahut hi lajwab gyan hindi ke bare me. Bahut si bate jan ne ke liye mili hindi aur dusri bhasha ke bareme. Dhanyavad.paribhasha lekh bahut bhaya. Naukri ke bare me jo kaha thodisi asahmat hu kintu aaj ke jamane ki vastavikta bhi hai. Ye aapse jyada kaun samjhenga. Humorous bhudhape ka chand. Sensational john ka offer. https://www.facebook.com/umesh0402/posts/944135508962254

  • M.R. Iyengar

    धन्यवाद पाठकों . आपने मेरी पुस्तक पसंद की. इससे मेरी पहली प्रकाशन के साथ मुझे भी आगे बढ़ने में सहायता मिलेगी. सादर आभार. रंगराज अयंगर.

  • mahesh tripathi

    पुस्तक "दशा और दिशा" का पहला ही लेख, 'हिन्दी की दशा और दिशा' हिंदी की वर्तमान स्थिती और उसके कारणों के बारे में बताता है. कवितायेँ वर्तमान परिस्थितियों का प्रतिबिम्बन करती हैं. "साहित्य समाज का आइना होता है" पुस्तक इस उक्ति को सत्य प्रतीत करती है. पुस्तक से लेखक का सामाजिक अनुभव झलक रहा है.

  • S D Kamewad

    मेरा रिवियू दशा और दिशा पुस्तक पर इस प्रकार है;- 1. हिन्दी की दशा और दिशा एवं अपनी भाषा ये एक वास्तविकता है हिन्दी की दशा की कथा है, अब समय आ गया हे की कुछ अवश्य होना चाहिए, इस क्षेत्र मे जागरूक होने और वर्तमान को सुधारने की आवश्यकता सभी को है, सरकार को भी इस पर कुछ स्ट्रॉंग कदम जरूर उठाना चाहिए। 2. प्रगति कविता, आज हुई प्रगति के नाम पर तमाँचा है। 3. शुद्धता कविता, वाकही ये दर्शाता है की हम किस वातावरण मे रहे है।, 4. अदृश्य के अस्तित्व का सवाल, गज़ब का विचार , ये हमे सोचने के लिए मजबूर कर देता हे कि कौन आस्तिक है और कोन नास्तिक ? 5. अंध विश्वास एवं आ अब लौट चले, बहुत सुंदर लेख है, जो हृदय को छु गए। कुल मिलकर बहुत अच्छा संग्रह है, लेखक ने अपने मन के विचार बहुत , ही निर्भीकता से रखे है। आज की पीड़ी के लिए ये संग्रह सही मायने मे आज की दशा बताता है साथ ही नई दिशा प्रदान करता है। सादर Regards एस डी कामेवाड

  • Glenn

    Superb ! Very nice book, apt cover page. Distinct opinion by an intellect and keen observations of the minute details. Would like to read more of his work.

  • BHUVNESHWAR PATEL

    Superb, great vision and expression of knowledge and experience..

  • shubhra

    very nice book

Ebook : 49 INR

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