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Mai Kehta Akhan Dekhi
Mai Kehta Akhan Dekhi

Ebook : 79 INR     Paperback : 149 INR

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ISBN : 978-93-85818-49-3

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संवेदनषून्यता, आस्थाहीनता, तात्कालिक राजनीतिक स्वार्थ की पूर्ति हेतु सिद्धांतहीन समझौते, आम नागरिक को वोट की राजनीति का खिलौना बनाकर साधन, साध्य और साधना की एकरूप पवित्रता को तिलांजलि देकर कथनी और करनी के बीच लगातार बढ़ती खाइयाँ, पुरखों से प्राप्त वैष्णवी मानसिकता की हजारों सालों की पुण्याई को ध्वस्त करने की मानसिकता, देष के भीतर सामाजिक न्याय और आर्थिक समानता पर आधारित आम नागरिक के जीवन को सामान्य से और बेहतर बनाने और जीवन जीने योग्य बनाने की बजाय उसमें अषांति का जहर घोल देने की साजिषों में लगातार वृद्धि हुई है। वहीं अंर्तराष्ट्रीय क्षेत्र में हुई कुछ गत वर्षो की घटनाओं ने हमारे समक्ष बहुआयामी चुनौतियों और संकटपूर्ण स्थितियों का निर्माण किया है।

Publisher : Onlinegatha

Edition : 1

ISBN : 978-93-85818-49-3

Number of Pages : 92

Weight : 94 gm

Binding Type : Ebook , Paperback

Paper Type : Cream Paper(70 GSM)

Language : Hindi

Category : Nonfiction

Uploaded On : March 11,2016

Partners : Payhip , Smashwords , Ebay , Kobo , Amazon , Flipkart , shopclues , ezebee.com , Paytm , Rockstand.in , scribd

''मै कहता आँखन देखी लघुकथा-संग्रह मेरी प्रथम प्रकाषित पुस्तक है। मूलत: मेरी साहितियक यात्रा कविता लेखन से प्रारंभ हुर्इ थी, जो निरन्तर जारी है। मैं यह दावा कदापि नहीं करता कि मैं कोर्इ स्थापित अथवा बड़ा लेखक हूँ। मैंने अपने जीवन में जो भी कुछ देखा-परखा, अनुभव किया, उसे ज्यों-का-त्यों, बिना मिर्च-मसाले के कागज पर उतारकर, आपके सामने प्रस्तुत कर दिया है।
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