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चीन में सात दिन
चीन में सात दिन

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चीन की साहित्यिक यात्रा मेरे लिए अत्यंत ही महत्वपूर्ण थी। जैसे ही चार-पांच महीने पूर्व डॉ. जय प्रकाश मानसजी की इस बार चीन में अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन के आयोजन किए जाने की घोषणा अंतरजाल पर पढ़ी, वैसे ही मन ही मन ह्वेनसांग व फाहयान के चेहरे उभरने लगे, दुनिया के सात आश्चर्यों में से एक आश्चर्य चीन की दीवार आँखों के सामने दिखने लगी और चीन की विकास दर का तेजी से बढ़ता ग्राफ मानस-पटल पर अंकित होने लगा। याद आने लगा वह पुरातन भारत जिसमें ह्वेनसांग,शुयान च्वांग व फाहयान चीन से यहाँ पढ़ने आए होंगे,तब चीन कैसा रहा होगा और नालंदा व तक्षशिला विश्वविद्यालय के वर्तमान खंडहर खोज रहे होंगे अपनी जवानी को उनकी पुस्तक "ट्रेवल टू इंडिया" के संस्मरणों में। तब चीन विपन्न था। कांग यौवे ने चीन की दोहरी दुनिया का खुलासा किया था - चीन में चारो तरफ भिखारी ही भिखारी नजर आते थे,बेघर,वृद्ध,लावारिस रोगी सड़कों पर दम तोड़ते दिखाई देते थे। यह बहुत ज्यादा पुरानी बात नहीं है। सन 1895 के आस-पास की बात रही होगी। जबकि सातवी शताब्दी ईसवी में ह्वेनसांग भारत अध्ययन के लिए आया था तथा उसने नालंदा विश्वविद्यालय के अनूठी अध्ययन प्रणाली, अभ्यास और मठवासी जीवन की पवित्रता का उत्कृष्टता से वर्णन किया। दुनिया के इस पहले आवासीय अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय में दुनिया भर से आए 10,000 छात्र रहकर शिक्षा लेते थे, तथा 2,000 शिक्षक उन्हें दीक्षित करते थे। यहां आने वाले छात्रों में बौद्ध यतियों की संख्या ज्यादा थी। भारत से लौटे यात्री शुयान च्वांग को याद करते हुए वरिष्ठ कवि अरुण कमल ने अपनी कविता "जंगली बत्तखों वाला पैगोड़ा" में लिखा:-
ओ! महाभिक्षु यात्री शुयान च्वांग
आज मैं आया हूँ भारत के पाटलीपुत्र से
शताब्दियों बाद उसी नालंदा के पास का एक क्षुद्र कवि
स्वीकार करो मेरा प्रणाम
तुम्हारे कपाल की अस्थि चमक रही है
स्मरण कर अपने धूल-धूसरित दिन बुद्ध की धरती के
वे जंगली बत्तख जो एक शाम कभी उड़ते हुए आये
फिर हर शाम आये
इतना शांत पवित्र था गगन यहाँ
इतनी हल्की पानी से छनी हवा

Publisher : Onlinegatha

Edition : 1

Number of Pages : 90

Weight : 150 gm

Binding Type : Ebook

Paper Type : Cream Paper(70 GSM)

Language : Hindi

Category : Fiction

Uploaded On : December 29,2015

Partners : Smashwords , scribd

दिनेश कुमार माली
सम्मान:
• कोल इंडिया तथा महनदी कोलफील्डस द्वारा राजभाषा सम्मान।
• भारतीय राजभाषा विकास संस्थान, देहरादून द्वारा आयोजित अखिल भारतीय राजभाषा संगोष्ठी 2011, मदुरै में राजभाषा विषिष्टता सम्मान तथा विषेष राजभाषा विषिष्टता सम्मान द्वारा सम्मानित।
• चतुर्थ अंर्तराट्रीय हिंदी सम्मेलन 2011 थार्इलैड में सृजन-सम्मान संस्थान, रायपुर द्वारा सृजन-श्री से सम्मानित।
• लखनऊ में आयोजित द्वितीय अंतराष्ट्रीय ब्लागर सम्मेलन में वर्ष 2012 के श्रेष्ठ लेखक (संस्मरण) के लिए तस्लीम परिकल्पना पुरस्कार से सम्मानित।
• भारतीय राजभाषा विकास संस्थान, देहरादून द्वारा आयोजित अखिल भारतीय राजभाषा संगोष्ठी-2012, षिमला में पुस्तक ओडिया भाषा की प्रति निधि कविताएं पर संस्थान का सर्वोच्च पुरस्कार-भारतेन्दु साहित्य षिरोमणि सम्मान तथा वैज्ञानिक आलेख पर वैज्ञानिक राजभाषा विषिष्टता सम्मान तथा हिन्दी के उन्नयन के लिए विषेष राजभाषा विषिष्टता सम्मान द्वारा सम्मानित।
• तालचेर की साहितियक संस्था आम प्रतिभा आम परिचय द्वारा सम्मानित।
• मांहगा-बड़यना साहित्य और संस्कृति परिषद, बालिचंद्रपुर, जाजपुर (ओडि़षा) द्वारा अनुसृजन प्रतिभा सम्मान-2014 सम्मानित।
• गड़जात फाउंडेषन, कोयला नगरी एक्सप्रेस द्वारा साहित्य सारथी सम्मान-2014 से सम्मानित।
संप्रति: महानदी कोलफील्डस लिमिटेड के तालचेर कोलफील्डस की लिंगराज खुली खुदान में वरीय प्रबंधक (खनन) के रूप में कार्यरत के अतिरिक्त नामित राजभाषा अधिकारी भी है।
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  • Ajay Aggarwal

    looking interesting.

  • Dinesh Mali

    अपने कलेवर में बहुत कुछ समेटे रखा है इस पुस्तक ने।न केवल यात्रा संस्मरण वरन चीन व भारत के साहित्यिक गतिविधियों की अनोखी दास्तान के साथ माओ त्से तुंग व लुशुन को भी नजदीकी से पढ़ पाएंगे आप।

Ebook : 59 INR

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