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रूह को पनाह
रूह को पनाह

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ISBN : 978-81-88167-89-4

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'रूह को पनाह काव्य-माल में मोतियों-सी पिरोई कवितांए चमकती तो हैँ ही,साथ ही शीतलता भी प्रदान करती हैँ|इन कविताओ के माध्यम से प्रेम की जो अभिव्यक्ति हुई है वह अधुभूद है | एक ओर निःस्वार्थ प्रेम की धार दिल से फूटती है तो दूसरी ओर दैहिक प्रेम की दुर्गन्ध से मन विचलित हो जाता है | डॉ अंजू दुआ जैमिनी ने प्रेम के दोनों पहलुओं से परिचित कराया है | इन साधारण शब्दों के अर्थ अत्यंत गूढ है और यूँ भी अंजू शब्दों की बाजीगरी में सिद्धहस्त है | छोटी-छोटी कविताओं के माध्यम से अंजू ने समाज को सन्देश दिया है की निःस्वार्थ प्रेम की तालाश आज भी सबको रहती है | इन मंझी कविताओं ने वास्तविकता के धरातल पर प्रेम की मीठी अनुभूति करवाई जो निश्चित ही प्रशंशनीय है | शीर्षक 'रूह को पनाह' एकदम सटीक है और शीर्षक कविता दिल को छूने वाली है खुदा के सजदे में सिर नवाती सी कवितायेँ हैँ सभी |

Publisher : Onlinegatha

Edition : 1

ISBN : 978-81-88167-89-4

Number of Pages : 118

Weight : 280 gm

Binding Type : Ebook

Paper Type : creme

Language : Hindi

Category : Nonfiction

Uploaded On : December 1,2015

Partners : scribd , Smashwords , Flipkart , Kobo , shopclues , google play

रचनाकार अंजु दुआ जैमिनी की नवीनतम काव्य-कृति है |अंजु दुआ को शिददत से एहसास है कि रूह को पनाह सिर्फ खुदा ही दे सकता है और खुदा तक पहुचना सबके लिए मुमकिन नहीँ क्योंकि उससे साक्षात् करने की कुव्वत सिर्फ इश्क में है| अंजु ने इस शाशवत सत्य को छोटी-छोटी कविताओ को समालोचक भले ही क्षणिकाओं की संज्ञा दें किन्तु इस सच्चाई से भी इंकार नहीं कर सकते कि इनका प्रभाव क्षणिक नहीं है बल्कि ये पाठको के मनो-मस्तिष्क पर लंबे अरेसे तक छाई रहेंगी और उन्हें उद्वेलित करती रहेंगी |
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  • shubhra

    superb ..!!!

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