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दीपमाला
दीपमाला

Ebook : 99 INR     Paperback : 329 INR

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ISBN : 978-93-85818-10-3

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मित्रों, नमस्कार! ब्लॉग जगत में २०११ से प्रवेश । सभी पाठकों, ब्लॉगर बंधुओं, मित्रों, शुभचिन्तकों, प्रशंसकों, समर्थकों और आलोचकों का हार्दिक धन्यवाद। इस सालों के सफ़र में आप सब ने जो सहयोग, प्यार और मान दिया है, उस के लिये मैं बहुत-बहुत शुक्रगुज़ार हूँ। पाठकों के सहयोग के बगैर कोई भी व्यक्ति अधिक समय तक नहीं लिख सकता। अपना स्नेह ऐसे ही बनाये रखें, ताकि मैं अपनी पूरी ऊर्जा, सामर्थ्य, निष्ठा और लगन के साथ लिखती रहूँ। इस मौके पर एक ग़ज़ल आप सब केलिए लिख रही हूँ |
आंसु उभर आये.................!!!

चलती बोलती तस्वीर गर पुछे,
इन्सान के जान का मोल बताये
मकसद तेज कदम राहे,
ख्वाहिशे कोशिश संजिदा किंमती बनाये
नाराजगी अंदाजे बयान हो तो भी,
गुलमहोर की गलियां बनाये
सफर तन्हा चौबारे पे चुडी की दुकान,
खडकी ये सवालात जताये
छोटी बकरी के संग मासुम टटोले,
जवाब चरागे किताब ले आये
तिनकों के नशेमन तक,
हुं हुं करे दिल फिर अखियों से बरसाये
बिखरी पडी हुई गुफ्तगु,
रोशनीकी छडी मेरे अपनेकी पेहचान लाये
पथ्थर की हवेली से कहीं दुर,
शिशो के घरोंदो के बाजु मुड के जाये
नजर बचाके आज भी वो देहाती मोड,
तलाशे आंसुमे बेह के जाये
लिखुं वो पहुंचे दिल तक दिन गुजरे,
जैसे अजनबी हुं यहा आये
वतन की तलाश मैं अपने ही घर मे,
जैसे एहसान उतारा जाये
बहोत अब ना सोचना देखो कही,
मेरे संग तेरे आंसु उभर आये

आपकी शुभकामनाओं, स्नेह, सहयोग और मशवरों की आकांक्षी...मै शिकागो मे रेहती हुं अपनी मातॄभाषा से मुझे लगाव है...लिखना अब आदत हो रही है !!
ये इश्क ना माने हार
और
ये दिल न माने बात
हो तेरा क्या केहना
महेशजी को समर्पन
- रेखा शुक्ला

Publisher : Onlinegatha

Edition : 1

ISBN : 978-93-85818-10-3

Number of Pages : 62

Weight : 60 gm

Binding Type : Ebook , Paperback

Paper Type : Cream Paper(58 GSM)

Language : Hindi

Category : Poetry

Uploaded On : November 17,2015

Partners : Flipkart , Smashwords , Lulu.com , Kobo , scribd , google play , shopclues , ezebee.com , Amazon

मित्रों, नमस्कार! ब्लॉग जगत में २०११ से प्रवेश । सभी पाठकों, ब्लॉगर बंधुओं, मित्रों, शुभचिन्तकों, प्रशंसकों, समर्थकों और आलोचकों का हार्दिक धन्यवाद। इस सालों के सफ़र में आप सब ने जो सहयोग, प्यार और मान दिया है, उस के लिये मैं बहुत-बहुत शुक्रगुज़ार हूँ। पाठकों के सहयोग के बगैर कोई भी व्यक्ति अधिक समय तक नहीं लिख सकता। अपना स्नेह ऐसे ही बनाये रखें, ताकि मैं अपनी पूरी ऊर्जा, सामर्थ्य, निष्ठा और लगन के साथ लिखती रहूँ। इस मौके पर एक ग़ज़ल आप सब केलिए लिख रही हूँ |
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  • sumit

    amazing experience while reading the book

  • shubhra

    Purchased an ebook and its superb very easy lines but great meanings

  • Rekha Shukla

    Its a kind request to all readers , please give your valuable reviews after reading my book

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