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बाघ
बाघ

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Category: Free Ebooks

Uploaded On: October 14,2015

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अकेला चना भाड़ नही फोड़ता है, ठीक है, पर चना जब भाड़ में कड़कता हैतो वह आॅंख फोड़ता है। तुमहारी नामदी॔ ने बाघा को बाघ बनाया था। अब वह बाघ नही बनेगा।..... नही बनेगा..... सुनो बीसलपुर सुनो बाघ नही बनेगा...... अलविदा रमा.......





तुमहारे शरीर पर एक कंकरीट का जंगल उग आया है। तुम बहुत दूर निकल गये हो। लोट आओ।

Edition : 1

Weight :

Binding Type : Ebook

Paper Type : creme

Language : Hindi

Category : Free Ebooks

Uploaded On : January 1,1970

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