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मूल जगत का बेटियाँ (3 छंद)
मूल जगत का बेटियाँ (3 छंद)

Ebook : 0 INR

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Category: Poetry

Uploaded On: September 3,2015

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आत्म-कथ्य

मैं बचपन से ही पढ़ने-लिखने की अति शौकीन रही हूँ, किताबों से जुड़े रहना मेरा पहला शौक हुआ

करता था। परिस्थितियों वश कब क्यों और कैसे इनसे नाता टूटता चला गया पता ही नहीं चला।

फिर अचानक कुछ विषम परिस्थितियों वश किताबों की दुनिया से अंतर्जाल पर कैसे जुड़ी यह

विस्मित करने वाली घटना ही है। उम्र के सातवें दशक में कंप्यूटर, इन्टरनेट सीखने से लेखन की

शुरुवात की। काव्य को समझने के एक वर्ष के अंदर ही पूर्णिमा जी(संपादक/अभिव्यक्ति अनुभूति ने

मेरी योग्यता, लगन और रुचि को देखते हुए मुझे अपनी पत्रिका के सहयोगियों में उप संपादक का

पद देकर सम्मानित किया।

उनके ही शब्दों में-

Edition : 1

Weight :

Binding Type : Ebook

Paper Type : Cream Paper(58 GSM)

Language : Hindi

Category : Poetry

Uploaded On : January 1,1970

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