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Corporate Panchtantra
Corporate Panchtantra

Ebook : 99 INR     Paperback : 180 INR

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ISBN : 978-93-85818-028

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SURVIVAL-GUIDE -हर नौकरीवाले के लिए अनिवार्य
बहुत कुछ सिखाया जाता है हमें स्कूलों, कालेजों, विश्वविद्यालयों में, फिर भी कुछ बातें कहीं भी औपचारिक तौर पर नहीं समझायी-सिखायी जाती। वह कहते हैं ना कि प्रेम को स्कूल में ना सिखाया जाता, (हालांकि अब तो तमाम रेडियो चैनलों पर लव-गुरु लव भी सिखाने लगे हैं)। कुछ ऐसा ही कहा जा सकता है कि किसी भी दफ्तर में, किसी नौकरी में बचे रहने के गुर, दूसरों की चमचागिरी से आपको होनेवाले नुकसानों को समझने का हुनर किसी कोर्स में नहीं सिखाया जाता। दफ्तर में चुगलीबाजी किस तरह से प्रेक्टिस की जाती है और उसके दुष्परिणामों से आप खुद को कैसे बचायें, यह किसी किताब में नहीं सिखाया जाता। बास को कैसे-कैसे साधा जाता है, ऐसे बहुत से हुनर-फन बंदा अपनी प्रतिभा-प्रेक्टिस से सीखता है। जिसमें प्रतिभा-समझ ना होती, वो मर जाता है। कमजोर की मौत है, अज्ञानी की मौत है। यह किताब ज्ञान बांटने की एक कोशिश है। किसी भी दफ्तर में चलनेवाली हर किस्म की चमचागिरी, चुगलखोरी, प्रमोशन वगैरह के पीछे की पालिटिक्स क्या है, इसे समझना हर उस बंदे या बंदी के लिए जरुरी है, जो किसी भी दफ्तर में बचा रहना चाहता है, प्रमोशन पाते रहना चाहता है।
इस किताब की 44 कहानियों से हर इंपलाई, हर नौकरीशुदा, हर आम आदमी दुनियादारी का ऐसे सबक हासिल कर सकता है, जो किसी भी कोर्स में नहीं दिये जाते।
सो इस किताब को पढ़िये और लाइफ में आगे बढ़िये, बस यह किताब किसी के साथ शेयर मत कीजिये। शेयर करके कोई समझदार हो गया, तो आपका एक कंपटीटर फोकटी में खड़ा हो जायेगा।
सुभाष चंदरजी ने व्यंग्य-कथाओं की बारीकियां बतायीं, समझायीं, उनका आभार।
अनूप शुक्लजी का विशेष आभार, उनका इस किताब के प्रकाशन में महत्वपूर्ण योगदान है।
आलोक पुराणिक
17 जून, 2015, बुधवार

Publisher : Onlinegatha

Edition : 1

ISBN : 978-93-85818-028

Number of Pages : 116

Weight : 261 gm

Binding Type : Ebook , Paperback

Paper Type : Cream Paper(58 GSM)

Language : Hindi

Category : HISTORY & POLITICS

Uploaded On : August 24,2015

Partners : Flipkart , Smashwords , Kobo , shopclues , ezebee.com , scribd , ezebee.com , Payhip , Paytm , Amazon , Rockstand.in

नाम-आलोक पुराणिक, ई-मेल-puranika@gmail.com जन्म-आगरा, 30 सितंबर, 1966 शिक्षा-एम.काम., पी एचडी. फिलहाल-दिल्ली विश्वविद्यालय के कालेज महाराजा अग्रसेन कालेज के कामर्स विभाग में बतौर एसोसियेट प्रोफेसर कार्यरत, प्रबंध संबंधी शिक्षा का लंबा अनुभव -इंडिया टुडे मीडिया इंस्टीट्यूट और माखनलाल चतुर्वेदी नेशनल युनिवर्सिटी आफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन में गेस्ट प्रोफेसर के तौर पर अध्यापन प्रकाशन-नवभारत टाइम्स, दैनिक हिंदुस्तान, राष्ट्रीय सहारा, दैनिक ट्रिब्यून, आई नेक्स्ट समेत कई अखबारों में नियमित व्यंग्य कालम लेखन-करीब दो हजार व्यंग्य लेख प्रकाशित किया ! 2007 के लिए- आर्थिक पत्रकारिता (प्रकाशक-प्रभात प्रकाशन, 2007) किताब पर भारतेंदु हरिश्चंद्र पुरस्कार, प्रकाशन विभाग, सूचना व प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार 2011 में व्यंग्य के लिए अट्टहास युवा सम्मान 2010-11 का हिंदी अकादमी दिल्ली का हास्य-व्यंग्य सम्मान 2012 काका हाथरसी पुरस्कार, हास्य-व्यंग्य के लिए 2013 में व्यंग्यकार के.पी.सक्सेना सम्मान, हास्य-व्यंग्य के लिए जीवन सत्य से नहीं, झूठ से चल रहा है जी और यह महत्वपूर्ण सत्य हमें किसी किताब में नहीं बताया जाता। जीवन में झूठ का क्या महत्व है, इसे कैसे बोलें। चमचागिरी, चुगलीबाजी जैसे महत्वपूर्ण मानवीय गुणों का विकास कैसे किया जाये, इस सवाल का जवाब इस किताब में बहुत अच्छी तरह से दिया गया। पढ़ें इस किताब को और जीवन सफल बनायें, यह किताब किसी को पढ़ने के लिए ना दें। यह किताब आपसे लेकर, इसे पढ़कर अगर किसी ने अपनी पर्सनल्टी डेवलप कर ली, तो बेकार ही में आपका एक और कंपटीटर खड़ा हो जायेगा। आपके लिए कंपटीशन और कड़ा हो जायेगा।
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  • Manisha Sahu

    i really love this book, its really help me, thank you alok.

  • Ramesh Thakur

    this book will teach you.how to get top place in today's corporate world.

  • Rita Rai

    how to survive in office? please read this book

  • shubhra

    superb one 5 stars for the book

  • Rejeev Khanna

    very good book , good one Mr. alok

Ebook : 99 INR

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