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कविता गंगा खंड-2
कविता गंगा खंड-2

Ebook : 0 INR

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Category: Free Ebooks

Uploaded On: May 4,2015

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आलोचक डॉ॰ शिवकुमार मिश्र का अभिमत :

महेंद्रभटनागर की कविता की, शुरूआती दौर से ही, यह विशेषता रही है कि कविताओं में भोगे और अर्जित किये हुए अनुभव-संवेदनों को ही उन्होंने तरज़ीह दी है। किताबी, आयातित या उधार लिया हुआ, उसमें लगभग कुछ भी नहीं है, न रहा है। इसी नाते उनकी अभिव्यक्ति विश्वसनीय भी है और सहज तथा प्रकृत भी। प्रगतिशील आन्दोलन के शुरूआती दौर में जो उफ़ान और आवेग, जो Loudness कविता में थी, उनकी कविता में उसकी अनुगूँजें नहीं आयीं। न तो वे पहले Loud थे और न ही आज हैं। रचनाधर्मी प्रयोग भी उसमें नहीं हैं। वह सीधी और सहज कविता है, फिर भी सपाट और सतही नहीं। चूँकि वह अनुभव-प्रसूत है अतएव उसमें शिल्प के बजाय बात बोली है

Edition : 1

Weight :

Binding Type : Ebook

Paper Type : white

Language : Hindi

Category : Free Ebooks

Uploaded On : January 1,1970

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