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लुटेरों का टीला
लुटेरों का टीला

    Paperback : 200 INR

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लुटेरों का टीला गाँव से बाहर एक छोटी सी पहाड़ी पर काली देवी का एक मंदिर था । आसपास के इलाके मेँ उसकी काफी मान्यता थी लेकिन स्थानीय मान्यता और परंपरा के अनुसार वहाँ सिर्फ खास उद्देश्य से ही जाते थे जैसे कोई मान्यता पूरी होने पर देवी की विशेष पूजा और धन्यबाद करने हेतु । वो भी शुक्रवार को । बाकी दिन वहाँ सुनसान और शांति पसरी रहती । नवरात्री के नौ दिनों मेँ जरूर प्रतिदिन बड़ी संख्या मेँ लोग देवी दर्शन और पूजा के लिए पहुँचते और हर समय हलचल बनी रहती ।

उस दिन शुक्रवार नहीं था । नवरात्री अभी दूर थीं । गोधूलि वेला में मंदिर की सीडियों पर एक साँवली तीखे नाकनक्श और बड़ी बड़ी आँखों वाली लम्बी और छरहरी लड़की बैठी थी । उसके काले घने और लंबे बालों की वेणी एक कंधे से होती हुई सामने लटकी हुई थी । ये पार्वती थी । उसे कैलाश का इंतजार था उसकी निगाहें जमीन से पहाड़ी के ऊपर तक आने वाली सीडियों पर थीं । तभी कैलाश ने पीछे से आकार उसे चौंका दिया । वह सीडियों के रास्ते से न आकर पीछे से चढ़ाई चढ़ता हुआ आया था ।

आते ही पार्वती ने उलाहना दिया

Publisher : Onlinegatha

Edition : 1

Number of Pages : 119

Weight : 150 gm

Binding Type : Paperback

Paper Type : creme

Language : Hindi

Category : Fiction

Uploaded On : February 3,2015

Customer Reviews
  • Pari Vikram

    When i read the description of this book i didn't imagine, that this book will not be interesting, but when i read this book, i realize, i that i was wrong. This is really good book.

  • Manisha Sahu

    really good story book, no doubt buy it.

  • Ramesh Thakur

    good story book.

  • Rita Rai

    nice story.

  • sumit

    Please write more description for your book so that we can read the book them , i want to buy the book but the content is not clear also the ebook is paid so i cannot read it also..Mr Ravi Ranjan , please get some more description int he book so that i can purchase it

Ebook : 99 INR

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