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कटे हुए पंखों वाली एक परी हो तुम।" उसने लिखा था। हर रोज ऐसी ही कुछ-न-कुछ कविता लिखकर वह भेजता था, ठीक उसी तरह जैसे कोई अठारह-उन्नीस साल का एक नवयुवक अपनी स्कर्ट पहनने वाली प्रेमिका को लिख रहा हो। उसने अपने ई-मेल में लिखा था, "कटे हुए पंखों वाली एक परी हो तुम। तुम्हारे प्यारे-प्यारे उन पंखों को किसी ने अपने पास रख लिया है। अगर वे पंख तुम्हें कोई लौटा देता, तो क्या तुम मेरे पास होती?"
कूकी उन ई-मेलों को बार-बार पढ़कर शर्म से लाल हो जा रही थी। जाने-अनजाने वे ई-मेल किसी की नजर में न पड़ जाए, यही सोचकर वह उन्हें एक जंक फोल्डर के अंदर डालकर रख देती थी. कुछ दिनों से उसे लग रहा था जैसे वह अपनी युवावस्था में लौट आई हो। सारी दुनिया उसे बहुत अच्छी लगने लगी थी। वह मानो लौट आई हो अपनी सोलह साल की उम्र में।
भले ही, कूकी एक कवयित्री नहीं थी, जैसे वह भी कोई कवि नहीं था; फिर भी उसका हर ई-मेल कविताओं से परिपूर्ण होने के साथ-साथ एक नएपन का आभास देता था। कविता लिखते-लिखते कभी वह अचानक से गद्य-जगत में प्रवेश कर जाता था तो कभी कभी गद्य लिखते लिखते अचानक से काव्य-जगत में कविता की धारा बनकर बहने लग जाता था।

Publisher : Onlinegatha

Edition : 1

Number of Pages : 227

Binding Type : Ebook

Paper Type : Cream Paper(58 GSM)

Language : Hindi

Category : Fiction

Uploaded On : December 16,2014

Partners : Flipkart , shopclues , scribd , Rockstand.in , google play

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  • Pari Vikram

    really good novel

  • Manisha Sahu

    accha likha hai dinesh ji ne

  • Rita Rai

    how can i get this book in hardcopy.

  • Onlinegatha

    Nice .....

Ebook : 58 INR

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