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Jazbaat
Jazbaat

Ebook : 50 INR     Paperback : 199 INR

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ISBN : 978-93-86915-42-9

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फ़ाकेहा ख़ान "सैलाब" के जज़्बातों का गुलदस्ता अपने जज़्बातों की गंध बिखेरते हुए आपके सामने पेश है । इसमें दो तरह के फूलों नग़्मात एवं ग़ज़लियात के सुन्दर गुच्छे हैं तथा नवगीतों की पत्तियों से उन्हें सजाया गया है । इन इन्द्रधनुषी ग़ज़लियात में ज़िंदगी के रंग , इंसानियत का संदेश , संस्कार , नेकनियती , आत्मविश्वास , प्रेम की तस्वीरें , दुनिया के दुःख और मजबूरियाँ बयाँ की गईं हैं वहीं पर समाज पर तंज भी कसे हैं । चाँद से बातें की हैं तो दीपक की रोशनी को बड़े ध्यान से परखा है । शायरा के सीने पर जब चाँद बेख़बर हो , सर रख कर सो रहा है तो जज़्बात शेर बन जाते हैं - रखकर मेरे सीने पे सर सो गया है चाँद ,देखो कितना बेख़बर हो गया है चाँद ।।और जब चाँद की नींद टूटती है तो -हम बैठे हैं रू-ब-रू चाँद के साथ ,हो रही है गुफ़्तगू चाँद के साथ ।।इधर शायरा और चाँद आपस में गुफ़्तगू में मस्त हैं उधर एक और चाँद दहलीज़ पर खड़ा हुआ इंतज़ार कर रहा है । ग़ज़ब । एक रात में दो-दो चाँद खिलें हैं ।एक चाँद दहलीज़ पर खड़ा इंतज़ार में है चाँद केदिल थाम ले हर कोई , कहीं ये क़यामत तो नहीं ।

Publisher : Onlinegatha

Edition : 1

ISBN : 978-93-86915-42-9

Number of Pages : 186

Binding Type : Ebook , Paperback

Paper Type : Cream Paper(70 GSM)

Language : Hindi

Category : Poetry

Uploaded On : January 3,2019

Partners : Flipkart , Amazon

फ़ाकेहा ख़ान ‘सैलाब’ के जज़्बातों का गुलदस्ता अपने जज़्बातों की गंध बिखेरते हुए आपके सामने पेश है । इसमें दो तरह के फूलों नग़्मात एवं ग़ज़लियात के सुन्दर गुच्छे हैं तथा नवगीतों की पत्तियों से उन्हें सजाया गया है ।
इन इन्द्रधनुषी ग़ज़लियात में ज़िंदगी के रंग , इंसानियत का संदेश , संस्कार , नेकनियती , आत्मविश्वास , प्रेम की तस्वीरें , दुनिया के दुःख , और मजबूरियाँ बयाँ की गईं हैं वहीं पर समाज पर तंज भी कसे हैं । चाँद से बातें की हैं तो दीपक की रोशनी को बड़े ध्यान से परखा है ।
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