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Bulandi
Bulandi

Ebook : 49 INR     Paperback : 120 INR

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ISBN : 9789386915634

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ग़ालिबन मेरी उम्र 17-18 वर्ष रही होगी। मुझे टेपरिकॉर्डर के जरिये एक मुशायरा सुनने का मौका मिला जिससे मेरा रुझान शायरी की तरफ बढ़ने लगा। मेरी वंशावली के अनुसार मेरे बुजुर्गों का रुझान सियासत की तरफ तो रहा परन्तु इस तरफ किसी का कोई रुझान नहीं था। सच्चाई यह है कि मुझे शायरी ननिहाल से विरासत में मिली। मेरे बड़े मां रसीद अहमद ख़ान दिलबर जो ग्राम व पो. नवीनगर जिला सीतापुर के रहने वाले थे। ओज पूर्ण हिंदी कवितायें और शायरी लिखा करते थे। भारत पाक की युद्ध के समय उनके द्वारा लिखी गयी एक छोटी सी पुस्तक 'वीरों धरती तुम्हें पुकारती' ने भारतीय नौजवानों में काफी हिम्मत बढ़ाई जिनकी कुछ रचनायें इस जिल्द के अंक में स्मृति स्व दे रहा हूँ। साथ ही इस रचना संग्रह के माध्यम से उन्हें खेराजे अकीदत पेश कर रहा हूँ। सबसे पहले मैं तकरीबन 62 रचनाओं को इस बुलन्दी की जिल्द अव्वल में पिरोकर आपके जेरे खिदमत पेश कर रहा हूँ अगर आप लोगों में हमारी हौसला अफज़ाई की और आपके यह जिल्द पसंद आयी तो जल्द ही बुलन्दी का दूसरा भाग आपकी खिदमत में पेश करने की कोशिश करूंगा। इंशा अल्लाह।

Publisher : Onlinegatha

Edition : 1

ISBN : 9789386915634

Number of Pages : 111

Weight : 60 gm

Binding Type : Ebook , Paperback

Paper Type : Cream Paper(70 GSM)

Language : Hindi

Category : Poetry

Uploaded On : October 5,2018

Partners : Amazon , Flipkart

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paperback
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  • robinjack

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Ebook : 49 INR

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