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TARUNNUM
TARUNNUM

Ebook : 170 INR     Paperback : 170 INR

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ISBN : 9789386915603

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‘‘श्री स्वरूप भारती’’ के गज़ल संग्रह ‘‘तरन्नुम’’ की पांडुलिपि को देखने का सुअवसर मिला। कवि के काव्यत्व की एक झलक गज़ल कार के रूप में देखने को इसमें मिलती है। ‘‘श्री भारती’’ की यह काव्य-कृति आज के प्रतिस्पद्र्धात्मक मायाजाल से उबर कर काव्य-सृजन के दायित्व का निर्वहन कर पाए, मुझे इस रूप में साहित्य का भविष्य सुरक्षित लगता है।
30 जुलाई सन् 1943 को जन्में भारती जी विगत कई दशकों से काव्य-सृजन में रत है। वे कवि रूप में बीस से अधिक काव्य संकलनों में अपनी उपस्थित दर्ज करा चुके हैं, आशा है कि भविष्य में भी उनकी लेखनी वाग्वेदी की सतत् स्तुति में लगी रहेगी।
प्रस्तुत गज़ल संग्रह ‘‘तरन्नुम’‘ में उनकी शताधिक गज़लों की झलक देखने को मिलती हैं। जिनमें कवि ने मानव मन की पल-पल की उथल-पुथल को सामाजिक तानों-बानों के परिप्रेक्ष्य में बड़े सुन्दर रंग से संजोया है।
इनकी गज़लें जिज्ञासा की शान्ति एवं समस्याओं के समाधान में सहायक बनकर मार्ग प्रशस्त करती हैं। कवि की भाषा प्रवाह-पूर्ण हिन्दी है। जिसमें उर्दू एवं अन्य भाषाओं का सामयिक प्रयोग कवि की भाषा पर पकड़ को दर्शाता है।
74 बसन्तों को पार कर चुके ‘‘श्री भारती’’ के कवि में अभी अपार सम्भावनाएँ हैं, जिनका आंशिक प्रस्फुटन ही इस कृति में हो सका है। श्री भारती कला, कविता के नए क्ष्तििजों का संस्पर्श करके साहित्य के भण्डार को भरकर यश ख्याति प्राप्ति करें यही मेरी शुभकामना है।

Publisher : Onlinegatha

Edition : 1

ISBN : 9789386915603

Number of Pages : 156

Weight : 100 gm

Binding Type : Ebook , Paperback

Paper Type : Cream Paper(70 GSM)

Language : Hindi

Category : Fiction

Uploaded On : September 12,2018

Partners : Flipkart

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Paperback
170 INR / 2.46 $
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  • vand06

    Why are you guys worried so much about the way that people are talking bout top5writingservices reviews? I think that it's alright and they will know about it once they are done with it.

Ebook : 170 INR

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