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Ebook : 50 INR 45 INR     Paperback : 170 INR

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ISBN : 978-93-86915-18-4

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इनमें से कुछ एक नज़्में कुछ खास लोगों की सेवा में पहले भी भेज चुका हूँ, उनके पास है भी या नहीं, मुझे नहीं पता। क्या पता पिछली दिवाली की साफ़ सफ़ाई में जला दी गयी हों।

Publisher : Onlinegatha

Edition : 1

ISBN : 978-93-86915-18-4

Number of Pages : 152

Weight : 150 gm

Binding Type : Ebook , Paperback

Paper Type : Cream Paper(70 GSM)

Language : Hindi

Category : Fiction

Uploaded On : April 11,2018

Partners : Smashwords , Payhip , Kraftly , Amazon , Kobo , Snapdeal

मुझे शायरी का शौक़ कहााँ से लगा यह तो नहीं जानता मगर इतना मालूम है कक ककिता मुझे किरासत में नहीं कमली और न ही मैं कभी कहिंदी का बहुत अच्छा किद्यार्थी रहा। हााँ, इतना ज़रूर र्था कक कहिंदी में रुकि र्थी मेरी। कुछ यादें जब भी ज़हन के ककसी कोने में गुफ़्तगू करती हुई कदख जाती हैं, तो उन लफ़्ज़ों को काग़ज़ पर ककसी की शक्ल में ढाल देता ह ाँ, ककसी कसकिल इिंजीकनयर की तरह, बस यही है मेरी शायरी, नहीं तो मुझे मोहब्बत नट-बोल्ट, कबजली के तारों और बड़ी-बड़ी मशीनों से भी है।
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